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ससुरालवालों को नींद की गोलियां खिलाकर बॉयफ्रेंड को घर बुलाती: एक रात पति जाग गया तो दोनों ने मार डाला, पत्थर बांध नहर में फेंकी लाश

 
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7 साल हो गए थे शादी को।6 साल का बेटा और 4 साल की बेटी।खुशहाल जिंदगी थी।एक रात पति अचानक घर से गायब हो जाता है।परिवार हर जगह ढूंढता है, लेकिन कहीं नहीं मिलता। पुलिस पत्नी पर शक जताती है, लेकिन ससुराल वाले कहते हैं- हमारी बहू बहुत अच्छी है, उससे कोई पूछताछ नहीं होगी। 6 महीने बाद एक रात बेटे की गुमशुदगी से बेचैन पिता घर में टहल रहा होता है।बहू के कमरे की लाइट चल रही होती है तो वहां जाता है।वहां बहू का वो रूप सामने आता है, जिसकी ससुर ने बुरे से बुरे सपने में उम्मीद नहीं की थी।

ससुर उसी वक्त पुलिस को फोन करता है- मेरे बेटे को बहू ने ही मारा है। पुलिस के लिए इस बात पर यकीन करना मुश्किल था।कई सवाल थे जो ससुर के आरोप को कमजोर कर रहे थे। 7 साल की शादी में कभी पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर कोई बड़ा झगड़ा नहीं हुआ तो हत्या की वजह क्या होगी? पत्नी के लिए घर में ही पति की हत्या कर लाश को गायब करना असंभव था? पत्नी ने अगर रात में घर में हत्या की तो परिवार के दूसरे सदस्यों को पता कैसे नहीं चला?

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6 महीने तक पति की लाश क्यों नहीं मिली?

मामले का सच जानने के लिए भरतपुर के नौंह गांव पहुंची।

भरतपुर के रहने वाले पवन शर्मा की 3 जून 2015 को कानपुर की रीमा की शादी हुई थी।पवन सामान्य परिवार से है।दो बहनें हैं।पिता हरीप्रसाद शर्मा किसान हैं।पवन दिल्ली में काम करता था।4 साल तक पवन दिल्ली में और रीमा गांव में रही। 2019 में पवन रीमा को अपने साथ दिल्ली ले गया।दिल्ली में पवन के गांव का भागेंद्र भी रहता था।शादीशुदा भागेंद्र लोन दिलाने का काम करता था।वहीं पर भागेंद्र और रीमा की मुलाकात हुई।धीरे-धीरे मुलाकात नजदीकियों में बदल गई। पवन काम पर जाता तो रीमा भागेंद्र को बुला लेती।दोनों साथ में घूमते।भागेंद्र उसे गिफ्ट भी लाकर देता था।इस दौरान दोनों के बीच कई बार संबंध बने।2021 में पवन ने दिल्ली का काम छोड़ दिया और रीमा के साथ वापस भरतपुर आ गया।

ससुरालवालों को नींद की गोलियां खिलाकर बॉयफ्रेंड को बुला लेती

भरतपुर आने के बाद रीमा और भागेंद्र का मिलना बंद हो गया था।बॉयफ्रेंड से मिलने के लिए रीमा ने साजिश रची।वो रात को पूरे परिवार को खाना, दूध-चाय में नींद की गोलियां मिलाकर दे देती।नींद की गोलियाें का असर होने के बाद बॉयफ्रेंड को बुला लेती।जिस कमरे में पति सो रहा होता, वहीं दोनों मिलते।

पवन की छोटी बहन ने बताया कि कई महीनों से रीमा मेडिकल स्टोर से नींद की गोलियां लाकर उसके भाई को खिला रही थी।भाई देर तक सोता रहता था।उसका भाई शराब भी पीता था।अक्सर रीमा उसे खुद ही कमरे में बैठाकर शराब पिलाने लगी।इसलिए रात काे भागेंद्र के आने पर पवन को कुछ पता नहीं लगता था।

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बहन को हुआ था शक

पवन की छोटी बहन शादीशुदा है।उसने बताया कि जब भी वो गांव आती थी तो खुद भी काफी देर तक सोती रहती थी।उसकी मां उसे जगाती रहती थी, लेकिन उठती नहीं थी, जबकि ससुराल में ऐसा कुछ नहीं होता था।समय से ही उठ जाती थी।ये बात उसने अपनी मां को भी कई बार बताई थी।लेकिन मां ने ध्यान नहीं दिया।

पत्नी-बच्चों के लिए साइकिल से 700 किमी का सफर

घरवालों ने बताया कि पवन रीमा से बहुत प्यार करता था।लॉक डाउन में रीमा कानपुर गई थी।तब पवन उसको 350 किलोमीटर साइकिल चलाकर लेने गया था।वहां एक दिन रुककर पत्नी और दोनों बच्चों को साइकिल पर ही लेकर आया।भरतपुर से कानपुर का सफर साइकिल से तय करने और वापस आने में उसे 7 दिन लगे थे।

रीमा ने मैसेज किया तो 200 किमी बाइक चलाकर भरतपुर पहुंचा भागेंद्र

29 मई को भागेंद्र और उसका दोस्त दीप शराब पार्टी कर रहे थे।उसी दौरान भागेंद्र को रीमा का मैसेज मिला- आज मिलने का मन कर रहा है।जल्दी आ जाओं।भागेंद्र भी कई दिनों से उससे मिला नहीं था।भागेंद्र ने दीप को साथ चलने के लिए तैयार कर लिया।
भागेंद्र और दीप 200 किलोमीटर बाइक चलाकर भरतपुर आ गए।भागेंद्र अंदर मकान में चला गया और दीप को बाहर ही कुछ देर तक रूकने के लिए बोला।

बेहोश पति के सामने कमरे में बनाए संबंध
भागेंद्र मकान में घुसा तो नींद की गोलियों के असर के कारण परिवार के सभी लोग सो रहे थे।वो सीधा रीमा और पवन के कमरे में चला गया।पवन बेहोशी की नींद सो रहा था।उसी कमरे में रीमा और भागेंद्र ने संबंध बनाए।

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इसी दौरान पवन की बेहोशी टूट गई।पत्नी को भागेंद्र के साथ आपत्तिजनक हालत में देखकर आग-बबूला हो गया।गुस्से में भागेंद्र को पकड़ लिया।रीमा ने पवन के पैर पकड़े तो धक्का देकर दूर गिरा दिया।भागेंद्र पवन का गला दबाने लगा और दीप को भी अंदर बुला लिया।तीनों ने मिलकर पवन का गला दबा कर मार दिया।

15 किलो का पत्थर बांध नहर में फेंका शव
हत्या के बाद भागेंद्र और रीमा ने लाश को चादर में लपेटकर रस्सी से बांध दिया।इसके बाद एक बोरी में लाश डाल दी।पहले भागेंद्र और रीमा ने कमरे में बिखरे खून को साफ किया।इसके बाद भागेंद्र और दीप बाइक पर शव रखकर उसे गांव से 2 किलोमीटर दूर सुनसान जंगल में नहर के पास ले गए। वहां उन्होंने बोरे में लाश के साथ 15 किलो का पत्थर बांध नहर में डाल दिया ताकि लाश पानी के ऊपर न आ जाए।दोनों रात करीब 2.30 बजे बाइक पर ही दिल्ली के रवाना हो गए।सुबह 8 बजे दोनों दिल्ली पहुंचे।

3 दिन बाद थी मैरिज एनिवर्सरी

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पवन और रीमा की तीन दिन के बाद ही मैरिज एनिवर्सिरी थी।पवन ने अपनी मैरिज एनिवर्सरी के लिए बहन को भी गांव बुलाया था।हत्या के अगले दिन रीमा सुबह उठी और पवन की तलाश करने का नाटक करने लगी।सास से कहा- पता नहीं आज जल्दी कहां चले गए? पवन के पिता हरिप्रसाद ने सोचा कि खेतों में गया होगा, आ जाएगा।दोपहर तक पवन नहीं आया तो वह गांव और खेतों में तलाशने लगे।उसका फोन भी बंद आ रहा था।परिवार सोचने लगा कि पवन कहीं गुस्से में नाराज होकर चला गया है।

हत्यारी पत्नी ने करवाचौथ का व्रत भी रखा
रीमा ने भागेंद्र को मैसेज कर दिया था कि कुछ दिनों तक फोन मत करना।कुछ दिनों के बाद परिवार में सब शांत हो गया।हरीप्रसाद परेशान होकर बेटे को इधर-उधर तलाश करते रहे।मर्डर के कुछ महीने बाद करवाचौथ आया।किसी को शक न हो, इसलिए उसने व्रत भी रखा।दीपावली भी मनाई।

ससुर ने कहा- हमें हमारी बहू पर पूरा विश्वास है

पवन के फाेन की लास्ट लोकेशन घर की ही आ रही थी।ऐसे में मामले में जांच कर रहे चिकसाना थाने के एएसआई ने उसकी पत्नी पर शक जताया और पूछताछ करने की बात कही।तब हरिप्रसाद ने कहा कि- उनकी बहू बहुत अच्छी है।पवन खुद ही कहीं चला गया है।रीमा से कोई पूछताछ नहीं होगी।उन्हें रीमा पर पूरा विश्वास है।


…और उस रात टूट गया भरोसा

5 महीने तक जब पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला तो रीमा और भागेंद्र दोनों बेफिक्र हो गए।दोनों को भरोसा हो गया कि पवन की मौत का राज हमेशा राज ही रहेगा और उन्हें कोई नहीं पकड़ पाएगा।
16 अक्टूबर को रीमा ने फोन करके भागेंद्र को दिल्ली से गांव बुला लिया।भागेंद्र गांव और रात को रीमा के ससुराल पहुंच गया।मौका पाकर वह रीमा के कमरे में चल गया।
इधर, पवन के पिता हरिप्रसाद लापता बेटे की चिंता में परेशान होकर टहल रहे थे।उन्होंने रीमा के कमरे की लाइट जली हुई देखी।कमरे से आवाज भी आ रही थी।कमरे के पास गए तो जो देखा वो किसी बुरे सपने से भी बुरा था।जिस बहू पर उन्हें हद से ज्यादा विश्वास था, वो किसी और के साथ आपत्तिजनक हालत में थी।उन्होंने कमरे के कुंडी लगा दी।हरिप्रसाद ने पुलिस को फोन किया और भागेंद्र के परिवार को भी बुलाया, जो पड़ोस में ही रहता है।

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भागेंद्र ने धमकी दी- तुझे भी मार डालूंगा
पुलिस के आने से पहले भागेंद्र का परिवार वहां पहुंच गया और झगड़ा करके उसे छुड़ा कर ले गए।भागेंद्र ने हरिप्रसाद को धमकी दी- ‘जैसे तेरे बेटे को मारा है, वैसे ही तुझे मार दूंगा।रीमा और मेरे बीच में मत आना।’ तब हरिप्रसाद का शक यकीन में बदल गया।उसने पुलिस को पूरी बात कही।पुलिस ने भागेंद्र के खिलाफ सबूत जुटाने शुरू किए।
इसी दौरान भागेंद्र दिल्ली चला गया और रीमा 28 अक्टूबर को कानपुर चली गई।30 अक्टूबर को पवन की बहन गांव आई तो रीमा के कमरे की तलाशी ली तो एक रजाई के खून लगा हुआ मिला।घरवालों ने ये सबूत पुलिस को दिए।पुलिस ने रीमा काे फोन कर बुलाया।कानपुर से रीमा अपनी मां के साथ वापस गांव आ गई।इधर पुलिस ने भागेंद्र को भी पूछताछ के लिए दिल्ली से बुला लिया।


6 घंटे की पूछताछ में भागेंद्र ने सच उगला
चिकसाना एसएचओ विनोद मीणा ने बताया कि 20 नवम्बर को दोनों से करीब 6 घंटे तक पूछताछ की।शातिर रीमा कई देर तक पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करती रही।दूसरी तरफ भागेंद्र से भी पुलिस ने पूछताछ शुरू कर दी।पहले ताे दोनों बातों काे घुमाते रहे।दोपहर में पुलिस ने सख्ती से भागेंद्र से पूछताछ की तो उसने सारी बातें सही बता दी।इसके बाद रीमा ने भी अपना जुर्म कबूल लिया।दोनों ने इसमें दीप के भी शामिल होने की बात कहीं।

लाश निकालने गए तो सिर्फ 17 हड्‌डियां मिली
दोनों से पूछताछ के बाद पुलिस जेसीबी और ट्रैक्टर लेकर नहर के पास शव निकालने पहुंंची।भागेंद्र ने उन्हें बताया कि शव कहां पर फेंका।उसकी निशानदेही पर बोरा निकाला गया।बोरे को खोलकर देखा तो उसमें सिर्फ 17 हड्‌डियां मिलीं।6 महीने में मछलियां और कछुए शव को पूरी तरह खा गए थे।बोरे में पवन की शर्ट, पर्स और दस्तावेज मिले।

बच्चे बोले मां भूतनी-चुडै़ल बन गई

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पवन के दो बच्चे हैं।बेटा 6 साल का और बेटी 4 साल की।टीम पहुंची तो दोनों बच्चे आपस में खेल रहे थे।बात की तो 4 साल की बच्ची बोली- मां चुडै़ल बन गई, भूतनी बन गई।पापा को गर्दन दबा कर मार दिया।दीवार पर खून लगा था।6 साल का बेटा बोला कि मां ने बताया कि पापा मर गया।मोबाइल को लॉकर में छुपा कर रखती थी।कई घंटों तक भोला चाचा से बातें करती थी।हरिप्रसाद बोले कि मेरे इकलौते बेटे को मार दिया।अगर वह भोला से प्यार करती थी तो चली जाती।हम उसे रोकते नहीं।उसने मेरा घर उजाड़ दिया।उसे सख्त सजा मिलनी चाहिए।

पति-पत्नी में 14 साल का अंतर

पवन(37) और रीमा(23) में 14 साल का अंतर है।शादी के वक्त रीमा की उम्र 16 और पवन की 30 थी।भागेंद्र 27 साल का है।उसके भी एक बच्चा है।भागेंद्र और उसकी पत्नी के बीच भी आए दिन झगड़े होते थे।भागेंद्र दिल्ली में और उसकी पत्नी गांव में रहती थी।

उम्रकैद हो सकती है

चिकसाना पुलिस कोर्ट में चार्जशीट पेश करेगी।चार्जशीट पेश करने के लिए 90 दिनों का समय होता है।पुलिस कोर्ट में मर्डर से संबंधित सारे सबूत पेश करेगी।इसके बाद कोर्ट में गवाहों के बयान कराएं जाएंगे एसएचओ विनोद मीणा का कहना है कि उनके पास अहम सबूत है।पुलिस के सबूतों और गवाहों के बयान के आधार पर कोर्ट आरोपियों को 10 साल से अधिक की सजा या फिर आजीवन कारावास सुना सकती है।