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Pinjore Garden : हरियाणा की शान और खास पहचान है पिंजौर गार्डन, हिमालय की पहाडिय़ों से सटा अद्भूत पर्यटन स्थल है

Sima Agarwal
20 Sep 2022 5:45 AM GMT
Pinjore Garden : हरियाणा की शान और खास पहचान है पिंजौर गार्डन, हिमालय की पहाडिय़ों से सटा अद्भूत पर्यटन स्थल है
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हरियाणा के पंचकूला जिला के एक छोटे से शहर में बना है यह खूबसूरत पिंजौर गार्डन। 100 एकड़ में फैला पिंजौर गार्डन मुगल वास्तु कला का एक अनूठा उदाहरण है। इस गार्डन के बगीचे में एक मिनी चिडिय़ाघर, जापान उद्यान और एक सुंदर टॉवर है। यहां पर एक नर्सरी भी बनी हुई है।

हरियाणा के पंचकूला जिला के एक छोटे से शहर में बना है यह खूबसूरत पिंजौर गार्डन। 100 एकड़ में फैला पिंजौर गार्डन मुगल वास्तु कला का एक अनूठा उदाहरण है। इस गार्डन के बगीचे में एक मिनी चिडिय़ाघर, जापान उद्यान और एक सुंदर टॉवर है। यहां पर एक नर्सरी भी बनी हुई है।

पिंजौर गार्डन में चार बाग पैटर्न है। यह बगीचा मुगल शैली में बनाया गया है। टैरेस गार्ड, भव्य मंडप और फव्वारे यहां पर हैं। इस बगीचे की बनावट ऐसी है कि सात अलग-अलग छतें हैं। बगीचे का मुख्य गेट पहली छत में खुलता है। यहां से आप झरने को देख सकते हैं। 17वीं शताब्दी में इस बगीचे का निर्मान मुगल सम्राट औरगंजेब और उनके चचेर भाई नवाब फिदाई खान ने करवाया। यहां हर साल मैंगो फेस्टीवल का आयोजन होता है। यहां पर आप ऊंट की सवारी भी कर सकते हैं।

मुगल नवाब फिदाई खान ने मुगल शैली में पिंजौर गार्डन बनवाया था। ऐसा माना जाता है कि एक बार नवाब फिदाई खान पिंजौर घाटी में दौरा कर रहे थे। इस दौरान वे पिंजौर की सुंदरता देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। तभी उन्होंने यहां पर बगीचे का निर्माण करवाया।

इस बाग को खासतौर से औरंगजेब के लिए गर्मियों के लिए हिमालय की पहाड़ी पर बनाया गया था। इसलिए इसे मुगल गार्डन के नाम से भी जाना जाता है। 1769 में पिंजौर के बागानों और साथ लगती जमीन को भुगतान के रूप में यह गार्डन पटियाला राज्य को दे दिया गया। 1775 में महाराजा अमर सिंह पटियाला प्रांत के शासक थे। महाराजा अमर सिंह ने इस बगीचे पर फिर से काम शुरू किया और इसे सुधारा।

साल 1966 में महाराजा यादविंदर सिंह ने पिंजौर के बागानों को राष्ट्र को दान कर दिया। इसकी वास्तु कला बड़ी अनूठी है। पहली छत से झरना नजर आता है। तीसरी छत पर सरु के पेड़ मन मोह लेते हैं। चौथी छत पर एक जल महल है। इसमें एक फव्वार लगा हुआ है। फव्वारे और पेड़ों की टहनियां अगली छत पर सजी हुई हैं। सबसे नीचली दत पर ओपन एयर थियेटर हैं। ङ्क्षपजौर गार्डन में बने शीश महल को फिदाई खान के दरबार के रूप में जाना जाता है। रंग महल को बेगमों के मनोरंजन स्थल के रूप में जाना जाता है।

जल महल फिदाई खान की बेगमों के स्नानघर के रूप में मशहूर है। रास्ते में चलने वाले पर्यटकों के लिए के लिए लम्बे वृक्ष छाया प्रदान करते हैं। यहां आप बगीचे की सैर करने के साथ बगीचे के बाहर ऊंट की सवारी का भी आनंद ले सकते हैं। यहां पर आम की बेशुमार किस्मों के पेड़ हैं। इस गार्डन में 100 से अधिक किस्मों के सुंगंधित फूलों के पौधे हैं। बगीचे में एक नर्सरी भी है। इस नर्सरी से आप फूलदार पौधे और गमले खरीद सकते हैं।

यहां लगने वाला मैंगो फैस्टीवल पूरे देश में मशहूर है। जुलाई के महीने में मैंगो मेले का अयोजन होता है। इस दौरान दुनिया भर के आम की किस्मो को रखा जाता है। इस दौरान पूरे भारत में उगाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के आम मिलते हैं। 1992 से मैंगो मेले का आयोजन हो रहा है। जुलाई के हर दूसरे सप्ताह के अंत में आयोजित होने वाला दो दिवसीय आम मेला दुनिया के सबसे बड़े मैंगो मेलों में से एक है। पिंजौर गार्डन में हर बरस बैसाखी का त्यौहार मनाया जाता है।

यह खाद्य बाजार, शिल्प बाजार, संगीत और प्रतियोगिताओं के साथ पिंजौर गार्डन में मनाए जाने वाले सबसे भव्य त्यौहारों में से एक है। पिंजौर गार्डन के अलावा पिंजौर में लाइंग क्लब भी है, जहां ग्लाइडर उड़ानों की ट्रेनिंग दी जाती है। देश -विदेश से आने वाले पर्यटक ग्लाइडर उड़ानों की ट्रेनिंग यहां लेते हैं। पिंजौर गार्डन में एक हैरिटेज ट्रेन चलती है जो परिसर में सभी स्मारकों और उद्यानों की सैर करवाती है।

पिंजौर गार्डन चंडीगढ़ से 22 किलोमीटर जबकि पंचकूला से करीब 16 किलोमीटर दूरी पर है। इस गार्डन के साथ ऐतिहासिक महत्व भी जुड़ा है। ऐसा माना जाता है कि इस गार्डन के पास ही एक जगह पर अपने निर्वासन काल के दौरान पांडवों ने कुछ समय बिताया। उस जगह पर पांडव गुफा बनी हुई है। गार्डन के पास ही भीमा मंदिर, चंडी मंदिर के अलावा कौशल्या डैम है। सूर्यास्त के बाद गार्डन में हरियाली पर पडऩे वाली रोशन से दृश्य और अधिक मनमोहक हो जाता है।

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