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Balvinder Jatana: कौन था बलविंदर सिंह जटाणा? जो सिद्धू मूसेवाला के नए गाने का है चेहरा.. SYL नहर विवाद से क्या है कनेक्शन?

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23 Jun 2022 4:38 PM GMT
Balvinder Jatana: कौन था बलविंदर सिंह जटाणा? जो सिद्धू मूसेवाला के नए गाने का है चेहरा.. SYL नहर विवाद से क्या है कनेक्शन?
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Balvinder Jatana: कौन था बलविंदर सिंह जटाणा? जो सिद्धू मूसेवाला के नए गाने का है चेहरा.. SYL नहर विवाद से क्या है कनेक्शन?

Who is Balvinder Jatana : पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला (Sidhu Moosewala) की हत्या के 26 दिन बाद उनका नया गाना रिलीज हुआ है. रिलीज होते ही यह गाना वायरल हो गया है और महज कुछ ही मिनटों में इसे लाखों लोग देख चुके हैं.

यह गाना पंजाब-​हरियाणा के सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर पर आधारित है. इसमें मूसेवाला ने बलविंदर सिंह जटाणा (Balvinder Singh Jatana) का जिक्र किया है. ये वही जटाणा हैं, जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर चंडीगढ़ में 2 अफसरों की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

इसके बाद अधिकारी इतने दहशत में आ गए थे कि यह काम यहीं रुक गया. इस काम में हाथ डालने की हिम्मत किसी की नहीं हुई. इस कारण पंजाब में सतलुज-यमुना लिंक नहर का काम वहीं रुक गया था.

बता दें कि पंजाब और हरियाणा के बीच सतलुज-यमुना के पानी को लेकर विवाद वर्षों से चल रहा है. पंजाब का तर्क है कि रवि और ब्यास नदियों के पानी का बहाव कम हो गया है, ऐसे में उसे ज्यादा पानी की जरूरी है.

वहीं हरियाणा की मांग है कि सतलुज-यमुना कैनाल का काम पूरा किया जाए, ताकि उसे करीब 3.5 मिलियन एकड़ फीट के क्षेत्रफल के बराबर पानी मिल सके. खैर पंजाब में बहुत से लोग जटाणा के कदम को जरूरी मानते हैं. ऐसे लोगों का मानना है कि बलविंदर सिंह जटाणा नहीं होता तो पंजाब के हिस्से का पानी हरियाणा को चला जाता.

कौन था बलविंदर सिंह जटाणा?
बलविंदर सिंह जटाणा रोपड़ का रहनेवाला था. उसका जुड़ाव बब्बर खालसा से था. वह बब्बर खालसा के मुखिया सुखदेव सिंह बब्बर के करीबियों में से एक था. इसलिए पंजाब के मालवा इलाके का उसे लेफ्टिनेंट जनरल बनाया गया था. उस इलाके में ​जटाणा के ही ​इशारे पर बब्बर खालसा की गतिविधियां संचालित हुआ करती थी.

भरी मीटिंग में इंजीनियर्स की गोली मारकर हत्या!
तारीख थी, 23 जुलाई 1990. चंडीगढ़ में सतलुज-यमुना लिंक नहर बनाने को लेकर बैठक चल रही थी. इस नहर के जरिये पंजाब से पानी हरियाणा होते हुए दिल्ली तक जाना था. बब्बर खालसा का इस पर विरोध था.

मीटिंग चल ही रही थी कि बलविंदर सिंह जटाणा अपने साथियों जगतार सिंह पिंजोला, हरमीत सिंह भाओवाल और बलबीर सिंह फौजी के साथ वहां आ धमके. बताया जाता है कि वाद-विवाद के दौरान SYL के चीफ इंजीनियर और सुपरिटेंडिंग इंजीनियर एमएस सिकरी और अवतार औलख की गोली मारकर हत्या कर दी गई.

जटाणा की दादी, चाची, बहन और भांजे को जिंदा जलाया!
अधिकारियों की हत्या के बाद बलविंदर जटाणा पर आरोप लगे, जिसके बाद पुलिस उसे ढूंढने लगी. 30 नवंबर 1991 को पुलिस उनके घर पहुंची. वहां बलविंदर तो नहीं मिला, लेकिन उसकी फैमिली के और लोग वहीं थे.

जटाणा की साथी रहीं निरप्रीत कौर का आरोप है कि पुलिस ने एक पूहला निहंग की मदद से जटाणा की दादी, चाची के अलावा बहन मनप्रीत कौर और भांजे सिमरनजीत सिंह को जिंदा जलवा दिया.

निरप्रीत कौर ने यह बात भी मानी कि अधिकारियों की हत्या जटाणा ने ही की थी. निरप्रीत के मुताबिक, जटाणा नहीं होता तो पंजाब के हिस्से का पानी हरियाणा और दिल्ली को चला जाता. तब के नेता लोग शांत हो गए थे. सभी आपस में मिले हुए थे. लेकिन इस बारे में लोगों को भनक नहीं थी. जटाणा को मालूम हुआ तो उसने लोगों की भलाई के लिए, पंजाब की भलाई के लिए इतना बड़ा कदम उठाया.

पुलिस ने किया जटाणा का एनकाउंटर
पुलिस जटाणा की तलाश में जुटी थी. हर तरफ सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था. जटाणा पर 16 लाख का इनाम घोषित कर दिया गया. 4 सितंबर 1991 को बलविंदर जटाणा अपने साथी चरणजीत सिंह के साथ साधुगढ़ गांव की तरफ जा रहा था.

दोपहर का वक्त था. उसकी नजर आगे पड़ी तो वहां पुलिस की नाकाबंदी थी. इसके बाद वह बगल के खेतों से होकर भागने लगे. इसी दौरान पुलिस ने गोली मारकर उसका एनकाउंटर कर डाला.

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