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वाहन चालकों की बढ़ी आफत हरियाणा के इस एक्सप्रेसवे से गुजरना होगा महंगा

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24 Jun 2022 8:08 AM GMT
वाहन चालकों की बढ़ी आफत हरियाणा के इस एक्सप्रेसवे से गुजरना होगा महंगा
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वाहन चालकों की बढ़ी आफत हरियाणा के इस एक्सप्रेसवे से गुजरना होगा महंगा

देश में तरक्की का काम खूब ज़ोर शोर से चल रहा है ऐसे में केंद्र सरकार ने देश भर में लोगों को बेहतर और सुगम यात्रा उपलब्ध करवाने के लिए नए हाईवे व राजमार्ग बना दिए हैं। केंद्र सरकार का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे माना जा रहा है, जहां पर तमाम सुविधाओं के साथ सफर का ना केवल बेहतर अनुभव रहेगा, बल्कि तमाम सुविधाएं भी उपलब्ध करवाने का दावा किया जा रहा है।

मगर अब इसी के साथ एक खबर यह भी आ रही है कि हरियाणा में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा टोल रेट बढ़ाने का मन बना लिया है। इसके लिए प्राधिकरण ने केंद्रीय सडक़ एवं परिवहन मंत्रालय से रेटों को बढ़ाने की अनुमति मांगी है। कहा जा रहा कि मंत्रालय की अनुमति मिलते ही हरियाणा में गई राजमार्गों पर टोल के रेट बढ़ जाएंगे, जिससे लोगों की जेब पर बोझ पडऩा लाजिमी है।

कहा जा रहा है कि अप्रैल में सभी दरें संशोधित हो सकती हैं और उनके रेट बढ़ाकर नए मूल्य लागू किए जा सकते हैं। इससे लोगों का नए हाईवे व राजमार्ग पर सफर करने का मजा किरकिरा हो सकता है।

दस प्रतिशत तक बढ़ेगा टोल रेट संभावना जताई जा रही है कि इन रेटों को दस प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। बढ़ाए जाने वाले रेट उन लोगों पर भी लागू होंगी, जिन्होंने मासिक पास बनवाए हुए हैं।

इसके अंतर्गत गुरूग्राम में स्थित खेडक़ी दौला टोल से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे और दिल्ली एक्सप्रेस वे से होकर सफर करते हुए जाना पड़ता है। यानि कि इन दोनों राजमार्गों के लिए एक ही टोल टैक्स से आवागमन होता है। इसी प्रकार से कुंडली मानेसर और पलवल केएमपी पर भी टोल टैक्स लागू है। इसी प्रकार से फरीदाबाद, गुरूग्राम, फरीदाबाद-सोहना रोड, फरीदाबाद से दिल्ली सहित कई टोल प्लाजा सक्रिय हैं ।

केएमपी पर रहेगा हरियाणा सरकार का नियंत्रण

इनमें से केएमपी पर सफर के लिए लागू होने वाले टैक्स की दरें हरियाणा सरकार के अधीन एचएसआईआईडीसी द्वारा तय किया जाता है, बाकियों पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा निर्धारित शुल्क लागू होता है।

प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि बीते कुछ सालों में इन टोल प्लाजा की वजह से काफी नुक्सान सहना पड़ा है। इसकी वजह से ही मजबूरी वश रेट निर्धारित करने की जरूरत महसूस की गई है। ताकि पिछले नुक्सान को कुछ हद तक पूरा किया जा सके।

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