राजनीति

क्या सियासत छोड़ रहे हैं गुलाम नबी आजाद? कार्यक्रम में दिए 'समाज सेवा' करने के संकेत

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21 March 2022 5:45 AM GMT
क्या सियासत छोड़ रहे हैं गुलाम नबी आजाद? कार्यक्रम में दिए समाज सेवा करने के संकेत
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क्या सियासत छोड़ रहे हैं गुलाम नबी आजाद? कार्यक्रम में दिए 'समाज सेवा' करने के संकेत

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने संकेत दिए हैं कि वे राजनीति से कभी भी संन्यास ले सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर उन्होंने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा है। रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर, राजनीति, रूस-यूक्रेन समेत कई मुद्दों पर बात की। आजाद को कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ बागी बने 'G-23' समूह का अगुवा भी कहा जा रहा है। हाल ही में उन्होंने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाकात की थी।

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और वरिष्ठ वकील एमके भारद्वाज की तरफ से एक कार्यक्रम आयोजित किया था। इस दौरान पद्म भूषण मिलने के लिए आजाद का सम्मान किया जाना था। कांग्रेस नेता ने कहा, 'हमको एक समाज में बदलाव लाना है। कभी-कभी मैं सोचता हूं, और कोई बड़ी बात नहीं है कि अचानक आप समझें कि हम रिटायर हो गए और समाजसेवा में लग गए।' खास बात है कि 35 मिनट के संबोधन में आजाद ने पहले ही साफ कर दिया था के वे उनका भाषण राजनीतिक नहीं होगा।

उन्होंने कहा, 'भारत में राजनीति इतनी खराब हो गई है कि कई बार शक होता है कि क्या हम इंसान हैं।' कार्यक्रम में चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अरुण गुप्ता, जम्मू यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति आरआर शर्मा और आरडी शर्मा, पूर्व एड्वोकेट जनरल असलम गोनी समेत कई बड़े नाम मौजूद थे।

आजाद ने कहा, 'हम सब अगर एक शहर को एक प्रोविंस को ठीक करेंगे, तो पूरा हिंदुस्तान ठीक होगा।' इस दौरान उन्होंने बदलाव लाने के लिए किसी भी राजनीतिक दल की क्षमताओं पर संदेह जताया। उन्होंने कहा, 'हमने इलाके के नाम पर बांट दिया लोगों को... फिर रीजन के नाम पर बांट दिया, गांव और शहर के नाम पर बांट दिया।' भाषण के अंत में उन्होंने कहा, 'मैं अपने आप को अपनी इंडिविजुअल कैपेसिटी में... एक इंसान की कैपेसिटी में... उस असली काम के लिए, सेवा के लिए, इंसान के लिए, अपने आप को समर्पित करता हूं। जब भी आप चाहेंगे मेरेको अपने साथ देखेंगे।'

जम्मू और कश्मीर को लेकर कांग्रेस नेता ने कहा कि आतंकवाद ने यहां कई जिंदगियां तबाह कर दी हैं, जिसमें पाकिस्तान बड़ी भूमिका निभा रहा है। आतंकवादियों ने सुरक्षाकर्मियों, पुलिसकर्मियों को मारा और कई को विधवा बना दिया, फिर चाहे वे कश्मीरी पंडित हों या कश्मीरी मुस्लिम। उन्होंने कहा कि जान गंवाने वाली बात को राजनीतिक रंग देना गलत है, क्योंकि क्षेत्र में सभी लोग आतंकवाद से प्रभावित हैं।

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